
सिद्धार्थनगर के शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के गुजरौलिया खालसा गांव में वन विभाग और किसानों के बीच जमीन विवाद गहराता जा रहा है। किसानों का आरोप है कि वन विभाग उनकी पैतृक खेती की जमीन पर नए पिलर लगाकर कब्जे की कोशिश कर रहा है। विवाद बढ़ता देख जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन रविवार को गांव पहुंचे और मौके पर जांच कर संयुक्त टीम बनाकर निष्पक्ष पैमाइश के निर्देश दिए।

2011 में हुई थी वन भूमि की पैमाइश, अब आगे बढ़कर पिलर गाड़ने का आरोप

ग्रामीणों के मुताबिक साल 2011 में वन विभाग ने अपनी जंगल की भूमि की पक्की पैमाइश कर तारबंदी कर दी थी। उस समय किसी तरह का विवाद नहीं था। लेकिन अब विभाग पुरानी बाउंड्री से आगे बढ़कर किसानों की निजी जमीन पर पिलर गाड़ रहा है। इससे करीब 50 किसानों की 50 बीघे से ज्यादा कृषि भूमि प्रभावित हो रही है।
ग्राम प्रधान रिंकू सिंह उर्फ सुनील ने कहा, “वन विभाग अब मनमाने तरीके से किसानों की जमीन में नए पिलर गाड़कर उसे जंगल की भूमि साबित करने की कोशिश कर रहा है। यह किसानों के अधिकारों का सीधा हनन है।”
3 करोड़ की बाउंड्री वॉल मंजूर होते ही तेज हुई कार्रवाई?
ग्रामीणों ने इस मुद्दे को लेकर राज्यसभा सांसद बृजलाल से मदद मांगी थी। चूंकि उनका पैतृक घर भी इसी गांव में है, इसलिए उन्होंने 2025 में गांव और जंगल के बीच सुरक्षा बाउंड्री वॉल निर्माण के लिए 3 करोड़ रुपये की राशि मंजूर कराई।
किसानों का आरोप है कि जैसे ही वन विभाग को इस निर्माण की जानकारी मिली, उसने विवादित जमीन पर नए पिलर गाड़ने की गतिविधियां बढ़ा दीं, ताकि जमीन को अपने अधीन दिखाया जा सके।
किसानों की चेतावनी- “यह कार्रवाई जारी रही तो कई परिवार भूमिहीन हो जाएंगे”
ग्रामीणों का कहना है कि जिन जमीनों पर पिलर गाड़े गए हैं, वे वर्षों से किसानों के कब्जे और पूरी तरह खेती योग्य भूमि हैं। प्रभावित किसानों में गोविंद लाल, रामदीन, राजमन, मदनलाल, भागीरथी, बाबूराम, रामानंद, दिनेश, मोती देवी, इंद्रावती देवी, किशोर, भीगा, व्यास, राधेश्याम समेत दर्जनों नाम शामिल हैं।
DM ने कहा- “किसान के साथ अन्याय नहीं होगा”
स्थिति गंभीर होने पर रविवार को जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन मौके पर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान SDM शोहरतगढ़ विवेकानंद मिश्र, डीएफओ नीला एम., रेंजर राजेश कुमार कुशवाहा, राजस्व टीम और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
DM ने दोनों पक्षों की बात सुनी और कहा- “किसी भी विभाग को मनमानी करने की अनुमति नहीं है। पुराने रिकॉर्ड और 2011 की पैमाइश का मिलान कर सत्यता सामने लाई जाएगी। यदि किसान की जमीन पर गलत तरीके से पिलर गाड़े गए हैं, तो उन्हें तुरंत हटाया जाएगा।”
उन्होंने वन विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम गठित करने के आदेश दिए, जो जल्द ही जमीन की दोबारा पैमाइश करेगी।
ग्रामीणों को मिली उम्मीद, प्रशासन से न्याय की आस
किसानों ने कहा कि वे अपनी जमीन बचाने के लिए कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे। जिलाधिकारी के हस्तक्षेप से ग्रामीणों को उम्मीद है कि वर्षों पुराना विवाद सुलझेगा और वन विभाग की मनमानी पर रोक लगेगी।












